26 जनवरी हमारे प्यारे देश भारत का गणतंत्र दिवस है यह दिन हमारे लिए विशेष महत्त्व रखता है हमारे देश में गणतंत्रात्मक शासन व्यवस्था है और इस दिन को खास और अहम बनाने के लिए इस विषय पर कार्यक्रम के दौरान भाषण का भी आयोजन किया जाता है
अगर आप व्याख्यान देना चाहते हैं तो हम आपको इस बारे में कुछ ऐसी बाते बताएंगे जिससे कि एक एक शब्द आपके मुख्य अतिथि, श्रोता और मेहमानों के बीच कौतूहल के साथ मन को प्रेरणा देगा।
26 जनवरी गणतंत्र दिवस 2024
किसी भी दिवस पर भाषण देने के पहले उसके इतिहास के बारे में जानना अति आवश्यक है हमारा भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ और तब तक देश को सुचारू रूप से चलाने के लिए कोई नियमबद्ध पुस्तिका नही थी ऐसे में 2 वर्ष 11 महीने और 18 दिन में 165 बैठक संपन्न हुईं तब एक किताब "संविधान" बनकर तैयार हुआ।
26 November 1949 को संविधान बनकर तैयार हुआ था (इस सभा के अध्यक्ष Dr Rajendra Prasad और निर्माण समिति के अध्यक्ष Dr Ambedkar थे) इसीलिए इस दिन को संविधान दिवस के रूप में मनाते हैं और 26 जनवरी 1950 को इसे लागू किया गया था तब से इस दिन को गणतंत्रता दिवस के रूप में मनाते हैं।
भाषण की शुरूवात में देशभक्ति की शायरी
जब भी आप इस विशेष दिन को अपने विद्यालय या किसी संस्थान में वक्तृता के प्रारंभ में देशभक्ति कोटेशन या शायरी से शुरूवात कर सकते हैं।
आज ना हिन्दू के लिए और ना मुसलमान के लिए
शब्द निकलेगा तो सिर्फ हिंदुस्तान के लिए।
क्योंकि मैं इसका हनुमान हूं और देश मेरा राम है
सीना चीर के देख लो अन्दर बैठा हिंदुस्तान है।
मैंने इस देश की मिट्टी खाई है इसीलिए मेरे रग रग में देशभक्ति का सैलाब बह रहा है यहां से शुरुआत के बाद भाषण शुरू कर सकते हैं।
26 January Speech 2024 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) भाषण
सबसे पहले मुख्य अतिथि सहित मंच में उपस्थित गणमान्यों को प्रणाम कर अभिवादन करें और फिर देशभक्ति शायरी के उद्घोष के साथ शुरू करें। आज हम यहां इस खास दिन का उत्सव मनाने के लिए इकट्ठा हुए हैं यह हमारा 75वाँ गणतंत्र दिवस है इस दिन तक पहुंचने के लिए लगभग 200 वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा अंग्रेजों की बेड़ियों को काटते हुए हमारे आजादी के महानायक महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, लाला लाजपत राय, जवाहरलाल नेहरू, शास्त्री, पटेल और अनेकों महनीय लोगों ने कई रातें जेलों में बिताई हैं कई क्रांतिकारी बिस्मिल, असफाक,भगत सिंह,राजगुरु, सुखदेव और खुदीराम बोस जैसे युवाओं ने फांसी के फंदों को चूमा है इन्हीं सब की कुर्बानी के बाद हम 15 अगस्त सन 1947 को पूर्ण रूप से आजाद हुए और 26 जनवरी 1950 को सुबह 10 बजकर अठारह मिनट पर अपने देश का संविधान लागू कर अंग्रेजों द्वारा लगाई बेड़ियों को हमेशा के लिए तोड़ दिया यही कारण है कि आज मायूस चेहरा भी तिरंगे की तरफ निहारता है तो खिल उठता है।
गणतंत्र दिवस की पहली परेड और Dr Ambedkar संविधान की पुस्तक Dr Rajendra Prasad को देते हुए |
आज हम 75 वर्षों में चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंच गए हैं करोना जैसी बीमारियों को जड़ से मिटा देने का माद्दा हमारे अन्दर है आज पुरुष हो या महिला लगभग हर फील्ड में बराबर का प्रदर्शन कर रहे हैं इन सफलताओं के बीच एक बात जो मुझे कचोटती है वह है देश के युवा कहीं न कहीं थोड़ा पथभ्रष्ट हो गए हैं देश के गणतंत्र की बात हो और युवाओं की बात न हो तो बेईमानी होगी क्योंकि किसी भी देश के निर्माण में युवा एक अहम कड़ी होती है मैं अपने देश के युवावों से बस दो ही शब्द कहना चाहूंगा कि
"जमाने भर में मिलते हैं प्रेमी हजारों..
मगर देश से सुन्दर कोई सनम नहीं होतानोटों और सोने के बिस्तर पर मरे हैं कई लोग..
लेकिन तिरंगे से खूबसूरत कोई कफन नही होता"
मित्रों! जहां एक तरफ विज्ञान हो या सैन्य अभियान हर क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है लेकिन वहीं एक तरफ दयनीय स्थिति भी है यहां जातिगत और धर्म आधारिक राजनीति चिंतनीय है भविष्य के दूरगामी परिणाम बहुत अच्छे नहीं हैं हम प्राचीन सभ्यता में विश्व गुरु थे इसके पीछे का तर्क हमारी धन दौलत नही बल्कि हमारी विभिन्नता में एकता की संस्कृति थी लेकिन कुछ अराजक तत्व लगातार इसे तोड़ने में लगे हुए हैं।
गणतंत्र दिवस के इस मौके पर लोकतंत्र के चार स्तम्भ की जरूर बात करनी होगी वरना हमारा और आपका एकतरफा संवाद पूरा नहीं होगा। विधायिका अहम अंग है और कानून तो आए दिन बन रहे हैं लेकिन कई सवाल अपने पीछे छोड़ जाते हैं यह सवाल आप पर छोड़ता हूं कि कितने कानूनों में बदलाव की जरूरत है।दूसरा स्तंभ कार्यपालिका मजबूत तो है लेकिन आज जितनी तकनीकी बढ़ी है उतना जोरों से भ्रष्टाचार भी बढ़ा है।तीसरा स्तंभ हमारा न्यायपालिका है जहां आज भी हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लाखों केस पेंडिंग हैं कई परिवार तो केसों के जाल में फंसकर तबाह हो गए। न्याय तो हमारे मानव सभ्यता का प्रथम चरण है अगर उसी पर इतनी देर होगी तो यह हमारे लोकतंत्र के लिए अशोभनीय होगी।
चौथा स्तम्भ मीडिया है लेकिन आज के परिवेश में इसके मायने बदल गए हैं प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया एडवरटीजमेंट के आधिकारिक केंद्र हो गए हैं ऐसे में क्या उनसे स्वतंत्र पत्रकारिता की उम्मीद की जा सकती है। गांधी और भगत सिंह के इस देश में प्रभाष जोशी और कुलदीप नैय्यर जैसे पत्रकार भी थे। ऐसा भी नहीं है कि इन स्तंभों का गोल्डन समय शुरूवात में था लेकिन समय के साथ जिस औसतन बदलाव की अपेक्षाएं थीं वह पूरी होती नहीं दिख रहीं।
इस ऐतिहासिक दिन पर सामने फहरे ध्वज तिरंगे तले बैठकर हमे इससे सीख लेनी चाहिए कि इसके तीन रंग में ऊपरी हिस्से पर केसरिया हमें देशभक्ति व शक्ति तथा साहसिकता को दर्शाता है वहीं बीच स्थित सफेद रंग शान्ति और सत्यनिष्ठा का प्रतीक है तथा हरा रंग हमारे संपन्नता तथा भूमि की उर्वरता का प्रतीक है और ठीक बीच में स्थित "अशोक चक्र" कर्तव्य पथ पर डटे रहने और उस पर स्थित 24 तीलियां देश के चौमुखी विकास की ओर इंगित करती हैं।
एक आखिरी बात और कहूंगा कि हमारे खाने में नमक हो या न हो लेकिन हमारे रक्त में देश का नमक अवश्य होना चाहिए तो मित्रों उठो जागो और आगे बढ़ो इस देश की तरक्की के योगदान में भागीदार बनो और आने वाली पीढ़ी के लिए इस देश रूपी बगिया को अपने आचारों विचारों और योगदान से सिंचित कर जाओ आखिरी पंक्ति आप सबको समर्पित करता हूं
"आजादी को जीने वालों हमे नही पता..
कब दिन ढलता है और कब सूरज चढ़ता है...
पर अतीत के पन्नों में झांक कर देखना...
हर आजादी के पहले मरना पड़ता है...।"
जय हिन्द, जय भारत, जय संविधान, लोकतंत्र अमर रहे!
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- संविधान क्या है? भारतीय संविधान का निर्माण - The Indian Constitution
निष्कर्ष
हमारा देश 76वें गणतंत्र की ओर बढ़ रहा है आजादी के इन सालों में देश ने बहुत कुछ बनाया संवारा है "हम भारत के लोग" भारत के संविधान की पहली पंक्ति है सुदृढ़ और विकसित भारत बनाने के लिए सबसे पहले नागरिकों को अपनी नागरिकता के साथ-साथ कर्तव्य परायणता का बोध जरूरी है।